‘बंदूक की जगह ब्रश, डर की जगह डायलॉग’, रंगों से युवाओं ने दिया भयमुक्त और रचनात्मक यूपी का संदेश
लखनऊ
स्वतंत्रता दिवस से पहले उत्तर प्रदेश में युवाओं को रचनात्मक अभिव्यक्ति का मंच प्रदान किया गया। इसके लिए 'रंग दे बसंती' अभियान प्रारंभ किया गया। इस अभियान के तहत बुधवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के पास आयोजित ग्रैफिटी वॉल कार्यक्रम युवाओं और कलाकारों के रचनात्मक प्रदर्शन का केंद्र बना। यहां शहर के कलाकारों ने माफियामुक्त और बदलते उत्तर प्रदेश को विषय बनाकर सार्वजनिक भित्ति चित्रों की पेंटिंग की। इन चित्रों के माध्यम से वर्ष 2017 से पहले के उत्तर प्रदेश और इसके बाद उत्तर प्रदेश में आए बदलाव को प्रदर्शित किया।
लाइव पेंटिंग के जरिये दिखाया बदलाव
दीवार पर कलाकारों ने अपने रंगों और कल्पनाशीलता के जरिए प्रदेश में कानून-व्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर और युवाओं के लिए बदले सकारात्मक माहौल को चित्रों में उकेरा। युवा चित्रकार मनीष सरोज की पेंटिंग ने 2017 से पहले माफिया राज से कराहते उत्तर प्रदेश का दर्द बयां किया तो अब बदलाव की सकारात्मक तस्वीर भी दिखाई।
युवाओं ने इंफ्रास्ट्रक्चर और बदलाव को बनाया विषय
*लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र रंजीत ने कहा कि ‘रंग दे बसंती’ मंच के माध्यम से युवाओं की ओर से प्रदेश में हुए बदलाव का संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भित्ति चित्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास, मेट्रो, सड़कों और सुरक्षा जैसे विषयों को शामिल किया गया है। रंजीत ने बताया कि आज प्रदेश में मेट्रो का विस्तार, सड़कों की स्थिति में सुधार हुआ है और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभियान के जरिए युवाओं की कोशिश है कि वे रंगों और कला के माध्यम से लोगों को बदले हुए उत्तर प्रदेश की तस्वीर दिखाएं।
युवाओं से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील
अभियान में शामिल छात्र अमन शुक्ला ने युवाओं से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि छात्रों/युवाओं को अपनी समस्याओं और मुद्दों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन करने का अधिकार है, लेकिन प्रदर्शन की आड़ में हिंसा, दंगा या उपद्रव नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ‘रंग दे बसंती’ के जरिए देश और प्रदेश को यह संदेश देने का प्रयास है कि विरोध और अभिव्यक्ति के लिए रचनात्मक माध्यमों का इस्तेमाल किया जा सकता है। युवाओं की आवाज को संवाद, कला और संगीत के जरिए सामने लाया जा सकता है।
बंदूक की जगह ब्रश, डर की जगह डायलॉग
कलाकारों ने दीवारों को केवल चित्रकारी का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक संवाद और युवाओं की अभिव्यक्ति का मंच बनाया है। ‘रंग दे बसंती’ थीम पर आधारित यह अभियान 11 से 14 अगस्त तक प्रदेश के विभिन्न शहरों में आयोजित हो रहा है। कविता, कला, संगीत, संवाद और डिजिटल अभिव्यक्ति के जरिए युवा अपनी आवाज सामने रख रहे हैं। 'बंदूक की जगह ब्रश, डर की जगह डायलॉग' की अवधारणा अभियान की मूल भावना है। इसका उद्देश्य युवाओं को भय और दबाव से दूर सकारात्मक, शांतिपूर्ण और रचनात्मक तरीके से अपनी बात रखने के लिए प्रेरित करना है। स्वतंत्रता दिवस से पहले यह अभियान नई सोच और सकारात्मक संदेश दे रहा है।
मुजफ्फरनगर में कॉमिक और संवाद कार्यक्रम होगा
अभियान के तहत 13 अगस्त को मुजफ्फरनगर में कॉमिक वितरण और संवाद कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस दौरान सांप्रदायिक सद्भाव पर आधारित मूल कॉमिक का वितरण किया जाएगा। इसके साथ ही स्कूलों में युवाओं के साथ संवाद भी होंगे। 14 अगस्त को ‘रंग दे बसंती’ अभियान का गीत 'डर से आजादी' लॉन्च किया जाएगा। इसके साथ ही रैप, संगीत और डिजिटल कला का समागम होगा।

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