Friday, April 17th, 2026

ऋतुराज वसंत के आगमन का पर्व वसंत पंचमी 3 फरवरी को मनाया जाएगा।

उज्जैन
ऋतुराज वसंत के आगमन का पर्व वसंत पंचमी 3 फरवरी को मनाया जाएगा। शुरुआत भगवान महाकाल के आंगन से होगी। भस्म आरती में पुजारी भगवान महाकाल को वसंत के पीले फूल व गुलाल अर्पित करेंगे।

दिन में भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली सांदीपनि आश्रम में उत्सव मनेगा। भगवान श्रीकृष्ण को पीले वस्त्र धारण कराकर वासंती फूलों से शृंगार कर मीठे पीले चावल का भोग लगाया जाएगा। वसंत पंचमी माता सरस्वती के प्राकट्य का दिन भी है। शहर की वेद पाठशाला व गुरुकुलों में सरस्वती पूजन होगा।

सभी मंदिरों में होता है वसंत उत्सव

महाकाल मंदिर के पं. महेश पुजारी ने बताया वसंत पंचमी ज्ञान, ध्यान, उल्लास, उमंग व नव पल्लव का पर्व है। इसलिए शैव व वैष्णव दोनों ही धारा के भक्त हरि, हर के भजन, पूजन, उत्सव का आनंद लेते हैं। इसीलिए शैव व वैष्णव परंपरा के मंदिरों में समान रूप से वसंत उत्सव मनाया जाता है।
महाकाल का केस युक्त पंचामृत से अभिषेक

ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में तड़के 4 बजे भस्म आरती में भगवान महाकाल का केसर युक्त पंचामृत से अभिषेक होगा। पश्चात पीले वस्त्र धारण कराकर वसंत पीले पुष्पों से शृंगार किया जाएगा। इसके बाद भगवान को सरसों के पीले फूल तथा गुलाल अर्पित की जाएगी। मंदिर की परंपरा अनुसार वसंत पंचमी से होली तक नित्य आरती में भगवान को गुलाल अर्पित किया जाता है।

सांदीपनि आश्रम : बच्चों का पाटी पूजन होगा

भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली सांदीपनि आश्रम में वसंत पंचमी पर भगवान श्रीकृष्ण का केसर युक्त जल से अभिषेक पूजन होगा। भगवान को वासंती पीले वस्त्र धारण कराए जाएंगे। पश्चात मीठे पीले चावल का भोग लगाकर आरती की जाएगी।

मां सरस्वती के प्राकट्य का दिन

पुजारी पं. रूपम व्यास ने बताया वसंत पंचमी माता सरस्वती के प्राकट्य का दिन है, इसलिए भगवान श्रीकृष्ण की पाठशाला में इस दिन पाटी पूजन कराकर बच्चों का विद्या आरंभ संस्कार कराया जाता है।

देशभर से माता पिता पहली बार विद्या अध्ययन की शुरुआत करने वाले छोटे बच्चों को यहां पाटी पूजन कराने के लिए लेकर आते हैं। मान्यता है सांदीपनि आश्रम में पाटी पूजन कर विद्या अध्ययन करने वाले बच्चे मेधावी होते हैं।

नील सरस्वती : स्याही से होगा अभिषेक

पुराने शहर में सिंहपुरी के समीप चौरसिया समाज की धर्मशाला के पास माता नील सरस्वती का छोटा सा मंदिर है। इस मंदिर में माता सरस्वती का स्याही से अभिषेक करने की परंपरा है। विद्यार्थी वसंत पंचमी के दिन तथा वार्षिक परीक्षा से पहले माता का स्याही से अभिषेक करने आते हैं। मान्यता है देवी की कृपा से विद्यार्थियों को सफलता प्राप्त होती है।

 

#Vasant Panchami 2025

Source : Agency

आपकी राय

14 + 4 =

पाठको की राय