Wednesday, July 15th, 2026

अयोध्या राम मंदिर में नौकरी के लिए जबरदस्त प्रतिस्पर्धा, पूर्व IPS सहित 1000+ लोगों ने भरे आवेदन

अयोध्या

अयोध्या राम मंदिर का पहला सीईओ बनने के लिए होड़ लग गई है। सूत्रों के मुताबिक तीन सदस्यीय समिति की ओर से आवेदन के लिए जारी ई-मेल आईडी पर मंगलवार देर रात तक एक हजार से ज्यादा आवेदन आ चुके थे। गौरतलब है कि सोमवार को भर्ती का नोटिफिकेशन जारी होने के 24 घंटे में अधिकृत ईमेल आईडी पर बड़ी संख्या में आवेदन आ गए हैं। आवेदन की आखिरी तिथि 18 जुलाई शाम चार बजे तक है। बताया जा रहा है कि चयन समिति ने तय किया है कि योग्यता के आधार पर आवेदनों को छांटने में मदद के लिए एक सेक्रेटरी नियुक्त किया जाएगा। ट्रस्ट की 22 जुलाई को होने वाली बैठक में सीईओ के नाम का ऐलान भी हो सकता है।

चंद घंटों में 750 से ज्यादा आवेदन आए
मंगलवार को चर्चा में रही मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चयन समिति के एक सदस्य ने बताया, नोटिफिकेशन जारी होने के कुछ ही घंटों में हमें पहले दिन करीब 750 आवेदन मिले हैं। 24 घंटे से भी कम समय में मिले इतने रिस्पॉन्स को देखते हुए उम्मीद है कि 18 जुलाई की डेडलाइन तक आवेदन हजारों में पहुंच जाएंगे। ऐसे में हमें तय मानदंडों के आधार पर आवेदनों को इकट्ठा करने, जांच-पड़ताल के लिए एक सचिव की आवश्यकता पड़ेगी। ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों के मुताबिक आवेदनों में देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त नौकरशाह हैं। इनमें कुछ के पास धार्मिक स्थलों में प्रबंधकीय व्यवस्थाएं संभालने का अनुभव भी है। चर्चा में आया है कि इनमें पूर्व नौकरशाहों के साथ ही सेना में प्रशासनिक व्यवस्थाएं संभाल चुके रिटायर्ड सैन्य अफसर भी शामिल हैं।

पूर्व आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर भी दावेदार
आवेदन करने की सार्वजनिक रूप से पुष्टि करने वालों में पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर भी शामिल हैं। उन्होंने कहा, ‘राम जन्मभूमि ट्रस्ट द्वारा सीईओ पद के लिए तय किए गए मानदंडों के तहत खुद को उपयुक्त पाते हुए मैंने आवेदन जमा कर दिया है। ठाकुर, जो पहले भी विवादों में रहे हैं, को पिछले साल लखनऊ पुलिस ने 1999 में देवरिया ज़िले में एक इंडस्ट्रियल प्लॉट हासिल करने के लिए कथित धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार किया था।

ट्रस्टियों पर कार्रवाई संभव,मुकदमे की तलवार
राममंदिर में चढ़ावे की रकम चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से एसआईटी को अब तक जांच की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने और संरचना का पूरा विवरण देने के निर्देश के बाद जांच प्रक्रिया और आगे बढ़ने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। साथ ही फाइनल रिपोर्ट में पूछताछ में शामिल हो चुके ट्रस्टियों पर भी केस दर्ज होने की तलवार लटकने लगी है। एसआईटी गठन के साथ शासन का निर्देश था कि पहले सात दिन में प्रारंभिक और 15 दिन में फाइनल रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। इसके बाद जांच प्रक्रिया की समय सीमा को और बढ़ा दिया गया। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, परत दर परत राम मंदिर परिसर के अंदर व्यवस्था में व्यापक स्तर पर झोल दिखने लगा। इसी दौरान विपक्ष ने जमीन घोटाले के जिन्न को बाहर निकाल दिया। देखते-देखते यह भी मुद्दा बन गया। अधिकारियों ने आरोप लगाने वालों से सत्यता की पुष्टि के लिए कागजात भी मांगे, जिसे आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह और हिंदूवादी संगठन के मुखिया संतोष दुबे ने सौंपा है।

 

#Ayodhya Ram Mandir

Source : Agency

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