Tuesday, April 21st, 2026

UGC के नियम कटघरे में: चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली
जातिगत भेदभाव से जुड़े UGC के नए नियमों के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है। शीर्ष न्यायालय ने बुधवार को इस याचिका को सूचीबद्ध करने की मंजूरी दे दी है। याचिकाकर्ता का कहना है कि नए नियमों के तहत सामान्य वर्ग से आने वाले छात्रों को शिकायत निवारण जैसी सुरक्षा नहीं मिलेगी। साथ ही इन्हें लागू होने से रोकने के निर्देश देने की मांग की।

बुधवार को तत्काल सुनवाई के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के सामने याचिका पेश की गई। इस पर उन्होंने कहा, 'हमें पता है क्या हो रहा है। यह पक्का करें कि सारी कमियां दूर हो जाएं। हम इसे सूचीबद्ध करेंगे।' खास बात है कि इन नए नियमों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कई याचिका दाखिल की जा चुकी हैं।

13 जनवरी को University Grants Commission (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026 जारी किए गए थे। साथ ही सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में इसे लागू करने के निर्देश दिए गए थे। नियमों की अनदेखी पर संस्थान के खिलाफ कार्रवाई की बात भी कही गई थी। नियम जारी होने के बाद से ही छात्रों का प्रदर्शन जारी है।

याचिका में क्या मांग
याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि इन नियमों को मौजूदा स्थिति में लागू करने से रोका जाए। साथ ही यह भी घोषित करने का अनुरोध किया गया है कि जाति के आधार पर निवारण व्यवस्था बनाना भेदभाव है। इसमें कहा गया है कि इस फ्रेमवर्क से गैर आरक्षित वर्गों के खिलाफ दुश्मनी को बढ़ावा मिलेगा।

न्यायालय से आग्रह किया है कि 'जाति-आधारित भेदभाव' की जाति-निरपेक्ष और संवैधानिक रूप से अनुकूल परिभाषा अनिवार्य की जानी चाहिए, जो जातिगत पहचान की परवाह किए बिना उन सभी व्यक्तियों को सुरक्षा प्रदान करे जिनके साथ जाति के आधार पर भेदभाव किया जाता है।

यूजीसी के नए नियम
यूजीसी ने 2026 के ये नियम राधिका वेमुला और आबेदा सलीम तड़वी (रोहित वेमुला और पायल तड़वी की माताएं) द्वारा 2019 में दायर एक जनहित याचिका के बाद बनाए थे। इस याचिका में उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव को दूर करने के लिए एक मजबूत तंत्र स्थापित करने की मांग की गई थी।

मार्च 2025 में, केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय को सूचित किया था कि यूजीसी ने जनहित याचिका में उठाए गए मुद्दों के समाधान के लिए नियमों का मसौदा तैयार कर लिया है। उस समय न्यायालय ने टिप्पणी की थी कि उसका इरादा परिसरों में जाति-आधारित भेदभाव से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एक 'बहुत मजबूत और पुख्ता तंत्र' सुनिश्चित करना है।

 

 

#UGC regulations

Source : Agency

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