Wednesday, April 22nd, 2026

3000 रुपये के लालच में गद्दारी ने बिगाड़ा सब कुछ, पहले थे ये दो लोग जो रोक सकते थे पहलगाम नरसंहार

पहलगाम 

22 अप्रैल, 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए खौफनाक आतंकी हमले में 26 नागरिकों को उनके परिवारों के सामने ही बेरहमी से भून दिया गया था। अब इस मामले की जांच में एक बेहद चौंकाने वाला और दुखद पहलू सामने आया है। जांच से पता चला है कि अगर जेल में बंद दो स्थानीय कश्मीरी निवासियों ने समय रहते पुलिस को सूचना दी होती, तो इस भीषण नरसंहार को आसानी से रोका जा सकता था।

चंद रुपयों के लिए आतंकियों को दी पनाह
इस मामले में गिरफ्तार किए गए दो स्थानीय लोगों की पहचान परवेज अहमद और बशीर अहमद जोथड के रूप में हुई है। जांच में यह बात सामने आई है कि इन दोनों ने महज 3000 रुपये के लालच में तीन पाकिस्तानी आतंकियों को अपने घर में पनाह दी थी और उनकी मदद की थी। 21 अप्रैल की रात यानी हमले से ठीक एक रात पहले तीनों आतंकी इन दोनों के घर आए थे। उन्होंने वहां करीब 5 घंटे बिताए और खाना भी खाया।

बातचीत के दौरान आतंकी पाकिस्तानी लहजे वाली उर्दू-पंजाबी मिश्रित भाषा बोल रहे थे। उनके पास अत्याधुनिक हथियार थे और वे 'अली भाई' नाम के शख्स का जिक्र कर रहे थे। अली भाई असल में लश्कर-ए-तैयबा के द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) का शीर्ष कमांडर और मुख्य आरोपी साजिद जट्ट है, जो पाकिस्तान के कसूर इलाके का रहने वाला है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, रात करीब 10:30 बजे आतंकी वहां से निकले। जाते समय उन्होंने अपने साथ कुछ खाना पैक किया और खाना पकाने का बर्तन, कंबल व तिरपाल भी साथ ले गए। इन सब संदिग्ध हरकतों के बावजूद परवेज और बशीर ने चुप्पी साधे रखी।

हमले वाले दिन आतंकियों को देखा, फिर भी रहे खामोश
हमले वाले दिन (22 अप्रैल, 2025) दोपहर करीब 12:30 बजे- यानी कत्लेआम शुरू होने से कुछ घंटे पहले परवेज और बशीर ने तीनों आतंकियों को बैसरन में एक बाड़ के पीछे छिपते हुए देखा था। इन आतंकियों की पहचान बाद में फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान शाह, हबीब ताहिर उर्फ जिब्रान और हमजा अफगानी के रूप में हुई।

यह पूरी तरह से स्पष्ट था कि इलाके में एक बड़ा आतंकी हमला होने वाला है। वे चाहते तो तुरंत पुलिस या स्थानीय टूरिस्ट ऑपरेटर्स एसोसिएशन को इसकी सूचना दे सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। वे अपने घोड़ों (टट्टुओं) के साथ वहां से दूर चले गए और अपने पर्यटक ग्राहकों के लौटने का इंतजार करने लगे। दोपहर 1:00 बजे से 1:30 बजे के बीच, उन्होंने पर्यटकों को घोड़ों पर बिठाकर वापस पहलगाम सुरक्षित पहुंचा दिया।

हमले के बाद फरार और एनआईए की कार्रवाई
जब इन दोनों को बैसरन में हुए दिल दहला देने वाले कत्लेआम की खबर मिली, तो वे समझ गए कि यह काम उन्हीं आतंकियों ने किया है जिन्हें उन्होंने पनाह दी थी। खुद को बचाने के लिए वे तुरंत अपनी 'ढोक' (पहाड़ों पर बनी अस्थायी झोपड़ी) छोड़कर वहां से भाग गए और छिप गए। राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) ने आखिरकार उन्हें ढूंढ निकाला और 22 जून, 2025 को दोनों को गिरफ्तार कर लिया।

पाकिस्तान का सीधा कनेक्शन और चार्जशीट
दिसंबर 2025 में एनआईए ने इस मामले में चार्जशीट (आरोप पत्र) दायर की। इस चार्जशीट में परवेज अहमद और बशीर अहमद के साथ-साथ मुख्य साजिशकर्ता साजिद जट्ट, तीनों पाकिस्तानी हमलावरों (जो अब मारे जा चुके हैं) और लश्कर/TRF को एक आतंकी संगठन के तौर पर नामजद किया गया है। खुफिया एजेंसियों के सूत्रों ने बताया कि इस हमले के पीछे पाकिस्तान का सीधा हाथ होने की पुष्टि फेसबुक द्वारा दी गई जानकारी से भी हुई है। भारत में एक भ्रामक पोस्ट फैलाई गई थी जिसमें दावा किया गया था कि 'जिब्रान हमारा आदमी था'। फेसबुक की जांच में यह पोस्ट पाकिस्तान के रावलपिंडी और बहावलपुर के फोन नंबरों से जुड़ी पाई गई, जो इस हमले में पाकिस्तानी साजिश का एक और पुख्ता सबूत है।

 

#Pahalgam massacre

Source : Agency

आपकी राय

9 + 9 =

पाठको की राय