Saturday, April 18th, 2026

यूपी प्रशासन में सख्ती: अफसर 10 मिनट में कॉल न उठाएं तो होगी कार्रवाई

लखनऊ
यूपी में जनप्रतिनिधियों की शिकायत अब दूर हो जाएगी। अफसर अब उनका फोन उठाने में आनाकानी नहीं कर सकते। 17 फरवरी को प्रदेश की विधानसभा तक में यह मामला उठ गया था। नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय द्वारा यह मुद्दा उठाए जाने पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा था कि विधायकों के फोन नहीं उठाने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी। अब प्रदेश में जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच संवाद को अधिक सुगम, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए एक और कदम उठाया गया है। 25 फरवरी से जनप्रतिनिधि-अधिकारी ‘संवाद सेतु’ (जिला संपर्क एवं कमांड सेंटर) व्यवस्था लागू की जाएगी। यह व्यवस्था पायलट प्रॉजेक्ट के रूप में गाजियाबाद, हरदोई और कन्नौज जनपदों में शुरू होगी। इस संबंध में समयबद्ध तैयारियों को लेकर समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने तीनों जनपदों के जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं। ताकि योजना सुचारु रूप से लागू हो सके।

फोन न उठने की समस्या का समाधान
इस नई व्यवस्था के अंतर्गत हर जनपद में जिला संपर्क एवं कमांड सेंटर स्थापित किया जाएगा। अगर किसी अधिकारी द्वारा जनप्रतिनिधि की कॉल 10 मिनट के भीतर रिसीव या कॉल बैक नहीं की जाती है, तो जनप्रतिनिधि कमांड सेंटर को सूचित कर सकेंगे। कमांड सेंटर संबंधित अधिकारी को तुरंत कॉल बैक के लिए निर्देशित करेगा और संवाद सुनिश्चित करेगा।

सम्मान भी, जिम्मेदारी भी
यह व्यवस्था केवल कार्य दिवसों और कार्यालय समय में और सरकारी (CUG) नंबरों पर लागू होगी। बेहतर संवाद और त्वरित प्रतिक्रिया देने वाले अधिकारियों को प्रोत्साहित किया जाएगा, जबकि लापरवाही की स्थिति में रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। गौरतलब है कि यह पहल विधानसभा में उठे मुद्दे के बाद अमल में लाई जा रही है। इस संबंध में राज्यमंत्री असीम अरुण ने सुझाव दिया था।

विधानसभा में हुई थी ये बात
नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय द्वारा विधानसभा में यह मामला उठाए जाने के बाद विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने स्पष्ट किया था कि कार्यपालिका द्वारा विधायिका और न्यायापालिका के क्षेत्राधिकार में हस्तक्षेप करने की सूचना संविधान के प्रावधानों के संदर्भ में होने के कारण इसे स्वीकारा गया है। उन्होंने कहा था कि नियम 300 के अंतर्गत नेता प्रतिपक्ष की सूचना के बारे में चर्चा से यह परिलक्षित होता है कि अधिकारियों के स्तर पर विधायकों को सहयोग नहीं किया जा रहा है। यह चिंता का विषय है। यह स्पष्ट करना भी उपयुक्त होगा कि संविधान के अनुच्छेद 164 (2) के अंतर्गत मंत्री परिषद राज्य की विधानसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होगी। विधानसभा के किसी सदस्य द्वारा यदि अधिकारियों से जनहित के कार्यों के लिए संपर्क किया जाता है तो वह सम्मान और समय दें और सुनवाई का अवसर प्रदान करें।

 

 

#Strictness in UP administration

Source : Agency

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