झारखंड में बढ़ा मिलेट खेती का रुझान, रांची सहित तीन शहरों में कैफे
रांची
झारखंड में पारंपरिक धान की खेती के साथ-साथ अब किसानों का रुझान मिलेट (मोटे अनाज) की खेती की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
राज्य में सुखाड़ की स्थिति को देखते हुए कृषि एवं पशुपालन विभाग भी मिलेट की खेती को विशेष रूप से प्रोत्साहित कर रहा है। इसी कड़ी में अब तक राज्य के 24,070 किसानों ने मिलेट मिशन के तहत खेती करने के लिए अपना पंजीयन कराया है।
प्रति एकड़ ₹3,000 प्रोत्साहन और 50% सब्सिडी पर बीज
मिलेट मिशन के तहत किसानों को प्रति एकड़ 3,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।
लाभ की सीमा: यह योजना न्यूनतम 10 डिसमिल और अधिकतम 5 एकड़ भूमि पर खेती करने वाले किसानों के लिए लागू होगी। यानी एक किसान को न्यूनतम ₹300 से लेकर अधिकतम ₹15,000 तक की प्रोत्साहन राशि मिलेगी।
सब्सिडी: इसके अलावा किसानों को मिलेट के बीज 50 प्रतिशत अनुदान (सब्सिडी) पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
कृषि विभाग ने पंजीकृत किसानों को प्रोत्साहन राशि के भुगतान के लिए जिलों को 11.47 करोड़ रुपये की राशि जारी कर दी है।
रागी, ज्वार और बाजरा पर सबसे ज्यादा जोर
मिलेट के अंतर्गत मुख्य रूप से रागी (मड़ुआ), ज्वार, बाजरा और मक्का की खेती की जाती है। झारखंड में सबसे अधिक रागी की खेती होती है, जिसके बाद ज्वार और बाजरा का स्थान आता है।
किसानों को जोड़ने के लिए राज्य के सभी 24 जिलों में 7 जुलाई से 22 जुलाई तक कुल 1,311 विशेष कैंप आयोजित किए गए थे।
विभाग ने इस वर्ष 1,17,440 एकड़ में मिलेट की खेती का लक्ष्य रखा है, जिसमें से अब तक 53,590.92 एकड़ भूमि पर बुवाई शुरू हो चुकी है।
रांची, देवघर और जमशेदपुर में खुलेंगे मिलेट कैफे
कृषि विभाग की मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की के अनुसार, विशेष पंजीयन अभियान के बेहद सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं।
राज्य में मिलेट के उत्पादों को लोकप्रिय बनाने और इसके विपणन (मार्केटिंग) को बढ़ावा देने के लिए रांची, देवघर और जमशेदपुर में आधुनिक मिलेट कैफे स्थापित करने की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है।

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