Friday, August 7th, 2026

Ayodhya Ram Mandir: ₹3300 करोड़ का हिसाब सही, घोटाले के आरोप खारिज; जांच में सामने आई यह अनियमितता

अयोध्या 
अयोध्या का राम मंदिर इस समय अपने दान चोरी को लेकर सुर्खियों में रहा है. अब इस बीच एक बड़ी खबर आ रही है. सरकारी सूत्रों की मानें तो राम मंदिर के 3300 करोड़ का हिसाब-किताब एकदम सही है. कोई घोटाला नहीं हुआ है. हेराफेरी हुई है तो बस हाथ से कैश गिनने के दौरान. इतना ही नहीं पूरा गणित भी समझाया है. आइए जानते हैं सबकुछ। 

इस कंपनी ने किया ऑडिट
अयोध्या में राम मंदिर के चंदे को लेकर चल रही अटकलों के बीच सरकारी सूत्रों का कहना है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी या भ्रष्टाचार के दावे सही नहीं हैं. राम मंदिर के लिए लोगों से मिले 3,300 करोड़ रुपये के चंदे का पूरा हिसाब-किताब रखा गया है. इसका स्वतंत्र बाहरी ऑडिटर एम/एस वी शंकर अय्यर एंड कंपनी ने ऑडिट किया है। 

कहां-कहां खर्च हुए रुपये?
सरकारी अधिकारियों ने बताया कि ट्रस्ट ने करीब 1,800 करोड़ रुपये मंदिर निर्माण और 400 करोड़ रुपये जमीन खरीद पर खर्च किए हैं. सभी भुगतान बैंकिंग व्यवस्था के जरिए किए गए हैं और कोई भी नकद (कैश) लेन-देन नहीं हुआ. आगे बताया कि ट्रस्ट की वित्तीय प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और सभी खर्च तय नियमों और बैंकिंग प्रोटोकॉल के तहत किए गए हैं. इसलिए बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी के आरोपों का कोई ठोस आधार नहीं है। 

इसलिए हुई इनकी गिरफ्तारी
राम मंदिर में दान की राशि को लेकर उठे सवालों पर सरकारी सूत्रों ने कई अहम बातें साफ की हैं. उनका कहना है कि यह मामला किसी बड़े घोटाले का नहीं, बल्कि दान की नकदी गिनने के दौरान हुई एक अलग चोरी का है. सूत्रों के अनुसार, दान पेटी (हुंडी) से निकली नकदी को मशीन से गिनने से पहले हाथों से अलग-अलग किया जा रहा था. इसी दौरान एसबीआई (SBI) की ओर से नियुक्त एजेंसी सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज (SSS) के छह बाहरी कर्मचारियों ने चोरी की. सीसीटीवी फुटेज के आधार पर सभी आरोपियों की पहचान कर उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया. अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इनमें से कोई भी आरोपी राम मंदिर ट्रस्ट या मंदिर प्रशासन का कर्मचारी नहीं था। 

सरकार ने यह भी बताया कि मामले की जांच के लिए बनाई गई विशेष जांच टीम (SIT) की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट नजर रख रहा है. जांच वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की देखरेख में की जा रही है ताकि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी रहे। 

किसी भी तरह का नकद भुगतान नहीं हुआ
जमीन खरीद में गड़बड़ी के आरोपों को भी सरकार ने खारिज किया है. सूत्रों के मुताबिक, मंदिर के लिए खरीदी गई पूरी जमीन का भुगतान बैंक से बैंक ट्रांसफर के जरिए किया गया, किसी भी तरह का नकद भुगतान नहीं हुआ. अधिकारियों का कहना है कि जमीन की कीमत इसलिए ज्यादा रही क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इलाके में जमीन के दाम बढ़ गए थे और कई व्यावसायिक ढांचों का भी मुआवजा देना पड़ा। 

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जून 2026 की घटना के बाद भी श्रद्धालुओं का भरोसा कम नहीं हुआ. राम मंदिर में आने वाले दान में कोई गिरावट नहीं आई. वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में हर महीने औसतन करीब 5 करोड़ रुपये हुंडी के जरिए दान के रूप में मिलते रहे. सरकार का कहना है कि यह मामला केवल चोरी की एक अलग घटना का है और इसे पूरे राम मंदिर ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था या दान प्रबंधन से जोड़कर देखना सही नहीं है। 

 

#Ram Mandir

Source : Agency

आपकी राय

6 + 7 =

पाठको की राय