AI से सुरक्षा का नया युग: जानें कैसे 2030 तक अपराध पर रखेगी नज़र
ब्रिटेन
ब्रिटेन सरकार ने एक गजब की तकनीक विकसित करने की और कदम बढ़ाए हैं। यह एक ऐसा AI सिस्टम होगा, जो अपराध को होने से पहले ही रोकने में मदद करेगा। इस नए सिस्टम के तहत एक रियल टाइम इंटरैक्टिव मैप तैयार किया जाएगा, जो यह अनुमान लगाएगा कि किन इलाकों में चोरी, चाकू से हमले या अन्य हिंसक अपराध होने की संभावना है। इसका मकसद लोगों के आसपास के इलाके को और सुरक्षित बनाना है।
अलर्ट भेज देगा AI सिस्टम
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यह AI बेस्ड सिस्टम अपराधों को रोकने और उनके होने का अंदाजा लगा लेगा। इसका प्रोटोटाइप अप्रैल 2026 तक तैयार होने की उम्मीद है। यह तकनीक इंग्लैंड और वेल्स के इलाकों में काम करेगी और पुलिस को यह जानकारी देगी कि किन जगहों पर चाकू से हमले, चोरी या असामाजिक व्यवहार जैसी घटनाएं हो सकती हैं। इसकी मदद से पुलिस पहले से ही अलर्ट होकर खतरनाक स्थितियों से निपट सकेगी।
डेटा का एनालिसिस करेगा सिस्टम
यह सिस्टम ब्रिटेन सरकार के 'सेफर स्ट्रीट्स मिशन' का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य शहरों में अपराधों को कम करना है। सरकार इस प्रोटोटाइप मॉडल के लिए शुरू में 40 लाख पाउंड यानी करीब 43 करोड़ रुपये का इन्वेस्टमेंट करेगी। इसका पूरा सिस्टम 2030 तक तैयार हो जाएगा। यह AI सिस्टम पुलिसअ और स्थानीय प्रशासन और सामाजिक सेवाओं के बीच शेयर किए गए डेटा का एनालिसिस करेगा। यह पुरानी घटनाओं के स्थानों और अपराधियों के व्यवहार के पैटर्न को देखकर अनुमान लगाएगा कि भविष्य में कहां अपराध होने की संभावना है।
यहां फेल रहा मॉडल
AI अपराध रोकेगा, सुनने में ये फिल्म की कहानी जैसा लगता है, लेकिन दुनिया के कुछ हिस्सों में ऐसी तकनीक पहले भी आजमाई गई है और इसके परिणाम मिले-जुले रहे हैं। उदाहरण के लिए, अमेरिका के लॉस एंजिल्स और शिकागो में इस्तेमाल किए गए ऐसे सिस्टम को नस्लीय भेदभाव के आरोपों के बाद बंद कर दिया गया, क्योंकि वे ज्यादा सफल नहीं थीं।
यहां सफल रहा मॉडल
नीदरलैंड में क्राइम एंटीसिपेशन सिस्टम यानी CAS नाम के एक प्रोजेक्ट ने चोरी की घटनाओं को कम करने में थोड़ी सफलता हासिल की है। डेनमार्क की पुलिस ने भी AI का इस्तेमाल धोखाधड़ी की जांच में किया और अच्छे नतीजे पाए। इन उदाहरणों से ब्रिटेन को उम्मीद है कि उनकी नया सिस्टम भी अपराधों को रोकने में मददगार होगी। 500 मिलियन पाउंड के 'R&D मिशन्स एक्सेलेरेटर प्रोग्राम' के तहत इस प्रणाली को 2030 तक पूरी तरह लागू करने की योजना है। यदि यह सिस्टम सफल रहा, तो यह न सिर्फ ब्रिटेन के लोगों को सुरक्षित रखेगा, बल्कि दुनिया भर के लिए एक मिसाल बन सकता है।

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