Saturday, July 11th, 2026

MP में फिलहाल हल्की बारिश, अगले हफ्ते फिर होगी झमाझम; भोपाल-इंदौर सहित 30 जिलों में बारिश ने तोड़ा औसत

भोपाल 

मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार, प्रदेश में सक्रिय मानसूनी सिस्टम कमजोर पड़ रहा है। इसके चलते अगले तीन दिन तक अधिकांश जिलों में रिमझिम और हल्की बारिश होगी। शनिवार को भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर समेत सभी 55 जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश होने के आसार हैं। कई स्थानों पर 40 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से तेज हवाएं भी चल सकती हैं।

 14 जुलाई से फिर बदलेगा मौसम
मौसम विभाग के मुताबिक, पाकिस्तान के ऊपर नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है। इसका असर अगले सप्ताह मध्य प्रदेश में दिखाई देगा। इसी वजह से 14 जुलाई से कुछ जिलों में एक बार फिर भारी बारिश का दौर शुरू होने की संभावना है।

खरीफ फसलों के लिए राहत भरा मौसम
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल तेज बारिश में आई कमी खरीफ फसलों के लिए फायदेमंद रहेगी। लगातार बारिश से कई जिलों के खेतों में पानी भर गया था, जिससे फसलों में गलन और नुकसान का खतरा बढ़ने लगा था। अब हल्की बारिश रहने से जलभराव कम होगा और फसलों को राहत मिलेगी।

पाक में मानसून का नया सिस्टम एक्टिव, एमपी में दिखेगा असर
पाकिस्तान के ऊपर एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है, जिसका असर अगले सप्ताह मध्य प्रदेश के मौसम पर दिखाई देगा। विभाग का अनुमान है कि 14 जुलाई से प्रदेश के कई जिलों में एक बार फिर भारी बारिश का नया दौर शुरू हो सकता है। ऐसे में लोगों को मौसम के बदलते मिजाज पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है।

किसानों के लिए अच्छे संकेत
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक फिलहाल तेज बारिश में आई यह कमी कृषि क्षेत्र के लिए राहत भरी साबित हो सकती है। पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण कई जिलों के खेतों में जलभराव की स्थिति बन गई थी, जिससे खरीफ फसलों में गलन और नुकसान की आशंका बढ़ने लगी थी। अब यदि कुछ दिन हल्की बारिश होती है तो खेतों से अतिरिक्त पानी निकल सकेगा और फसलों को बेहतर बढ़वार के लिए अनुकूल वातावरण मिलेगा।

प्रदेश में 9.5 इंच बारिश दर्ज 
बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो जून में सामान्य से कम वर्षा होने के बावजूद जुलाई के शुरुआती नौ दिनों में अच्छी बारिश ने पूरे प्रदेश की स्थिति बदल दी है। अब तक मध्य प्रदेश में लगभग 240 मिलीमीटर यानी करीब 9.5 इंच बारिश दर्ज की जा चुकी है, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षा 222.1 मिलीमीटर मानी जाती है। इस तरह प्रदेश में औसत से लगभग 8 प्रतिशत अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में सामान्य से 24 प्रतिशत ज्यादा वर्षा हुई है, जबकि पूर्वी मध्य प्रदेश अभी भी सामान्य से करीब 8 प्रतिशत पीछे चल रहा है।

सबसे अधिक वर्षा देवास जिले में दर्ज
प्रदेश में पूरे मानसून सीजन के दौरान औसतन 37.3 इंच बारिश होती है। इस बार अब तक सबसे अधिक वर्षा देवास जिले में दर्ज की गई है, जहां सामान्य से 115 प्रतिशत अधिक यानी करीब 18 इंच बारिश हो चुकी है। हरदा में लगभग 15 इंच, इंदौर और सीहोर में करीब 14-14 इंच तथा राजधानी भोपाल में 13.1 इंच वर्षा रिकॉर्ड की गई है। दूसरी ओर, आलीराजपुर प्रदेश का सबसे कम बारिश वाला जिला बना हुआ है, जहां अब तक केवल करीब 2.25 इंच वर्षा दर्ज की गई है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले सप्ताह मानसून दोबारा सक्रिय होने के बाद बारिश के आंकड़ों में और बढ़ोतरी होने की संभावना है।

इन जिलों में सामान्य से ज्यादा और कम बारिश
अब तक आगर-मालवा, भोपाल, इंदौर, देवास, गुना, ग्वालियर, हरदा, खंडवा, खरगोन, राजगढ़, रतलाम, शाजापुर, उज्जैन, विदिशा, छिंदवाड़ा, पन्ना और सिवनी समेत कई जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। वहीं अनूपपुर, बालाघाट, जबलपुर, कटनी, मंडला, रीवा, सागर, सतना, सीधी, सिंगरौली, नर्मदापुरम, रायसेन, शिवपुरी और कुछ अन्य जिलों में अभी भी सामान्य से कम वर्षा हुई है। 

जुलाई ने बदली बारिश की तस्वीर
जून में सामान्य से कम बारिश होने के बावजूद जुलाई के शुरुआती नौ दिनों में अच्छी वर्षा ने स्थिति बदल दी। प्रदेश में अब तक करीब 240 मिलीमीटर (9.5 इंच) बारिश दर्ज की जा चुकी है, जो सामान्य 222.1 मिलीमीटर से करीब 8 प्रतिशत अधिक है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में औसत से 24 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई है, जबकि पूर्वी हिस्से में अभी भी 8 प्रतिशत कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है।

देवास सबसे आगे, भोपाल-इंदौर में भी अच्छी बारिश
प्रदेश की सामान्य मानसूनी बारिश 37.3 इंच मानी जाती है। इस सीजन में देवास सबसे ज्यादा बारिश वाला जिला बना हुआ है, जहां सामान्य से 115 प्रतिशत अधिक यानी करीब 18 इंच बारिश हो चुकी है। हरदा में 15 इंच, इंदौर और सीहोर में 14 इंच, जबकि भोपाल में 13.1 इंच वर्षा दर्ज की गई है। दूसरी ओर, आलीराजपुर में सबसे कम करीब 2.25 इंच बारिश रिकॉर्ड हुई है। 

 

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Source : Agency

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