Sunday, April 19th, 2026

ललन सिंह बोले- अब इन्हें भी आने दीजिए, सरस्वती पूजा पंडाल में बेटे को देख मुस्कुराए नीतीश

पटना.

बिहार की राजनीति अक्सर इशारों, मुस्कानों और खामोशी के बीच फैसले करती है. ऐसा ही एक पल शुक्रवार को पटना स्थित जेडीयू आईटी सेल कार्यालय में देखने को मिला, जब सरस्वती पूजा कार्यक्रम में नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की मौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी.

केंद्रीय मंत्री ललन सिंह की एक हल्की-सी टिप्पणी और मुख्यमंत्री की मुस्कान ने इस चर्चा को और तेज कर दिया कि क्या निशांत कुमार की ‘राजनीतिक पारी’ अब बस शुरू होने वाली है.

“तुम कब आ गए?” और उसके पीछे छिपा संकेत
जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे और उन्होंने निशांत को पहले से मौजूद देखा, तो सहज भाव में पूछा, “तुम कब आ गए?” निशांत का जवाब था, “आधा घंटा हो गया है.” यह संवाद भले ही सामान्य लगे, लेकिन राजनीति में हर शब्द और हर भाव का अपना अर्थ होता है. यह पहली बार नहीं है जब निशांत किसी सार्वजनिक राजनीतिक कार्यक्रम में दिखे हों, लेकिन इस बार माहौल कुछ अलग था. उनके साथ केंद्रीय मंत्री ललन सिंह की मौजूदगी और पूरे कार्यक्रम में राजनीतिक गर्माहट साफ महसूस की जा सकती थी.

ललन सिंह की लाइन और नीतीश की मुस्कान
कार्यक्रम के दौरान ललन सिंह ने मजाकिया लहजे में नीतीश कुमार से कहा, “बोल दीजिए कि मानेंगे.” मतलब साफ था कि निशांत कुमार के राजनीति में आने पर अपनी सहमति दे दीजिए. इस पर मुख्यमंत्री और निशांत दोनों ही कुछ बोले नहीं, बस मुस्कुराते रहे. बिहार की राजनीति में यह मुस्कान किसी बयान से कम नहीं मानी जा रही है. यह न तो सीधा इनकार था और न ही खुला समर्थन, बल्कि संभावनाओं का एक दरवाजा खोलने वाला संकेत था.

निशांत कुमार की मौजूदगी क्यों बन रही है बड़ी खबर
निशांत कुमार अब तक सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए रखते आए हैं. वे चुनावी मंचों, रैलियों और पार्टी की रणनीतिक बैठकों से दूर ही दिखे हैं. ऐसे में जेडीयू आईटी सेल जैसे राजनीतिक रूप से अहम मंच पर उनकी मौजूदगी अपने आप में खास है.
वहां उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से घुल-मिलकर बातचीत की, सरस्वती पूजा में हिस्सा लिया और पूरे कार्यक्रम में सहज दिखाई दिए. यह सब उस छवि से अलग था, जिसमें निशांत को हमेशा राजनीतिक हलकों से दूर रहने वाला माना जाता रहा है.

बिहार की राजनीति और ‘राजनीतिक उत्तराधिकार’ की बहस
बिहार में परिवारवाद हमेशा एक संवेदनशील मुद्दा रहा है. लालू प्रसाद यादव से लेकर रामविलास पासवान तक, हर बड़े नेता के परिवार ने राजनीति में अपनी जगह बनाई है. नीतीश कुमार को अब तक इस मामले में अलग माना जाता रहा है, क्योंकि उन्होंने कभी अपने बेटे को राजनीति में आगे नहीं बढ़ाया. यही वजह है कि निशांत कुमार की मौजूदगी और उस पर नीतीश की चुप्पी ज्यादा मायने रखती है. यह चुप्पी कहीं न कहीं इस संभावना को मजबूत करती है कि भविष्य में तस्वीर बदल सकती है.

फिलहाल न तो नीतीश कुमार ने कोई औपचारिक ऐलान किया है और न ही निशांत कुमार ने अपनी मंशा जाहिर की है. लेकिन बिहार की राजनीति में इतना भर काफी है कि एक मुस्कान और एक चुप्पी से नई चर्चाओं का दौर शुरू हो जाए. अब सबकी नजर इस पर टिकी है कि यह मुस्कान आगे चलकर राजनीतिक हरी झंडी में बदलती है या फिर सिर्फ एक संयोग बनकर रह जाती है.

 

#Lalan Singh

Source : Agency

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