Tuesday, April 21st, 2026

पहली बार मोदी सरकार ने यूजीसी विवाद पर तोड़ी चुप्पी, धर्मेंद्र प्रधान ने छात्रों को दिया आश्वासन

नई दिल्ली
यूजीसी रूल्स 2026 का देश भर में विरोध हो रहा है। सवर्ण बिरादरियों से जुड़े संगठन ने इन नियमों पर सख्त आपत्ति जताई है और प्रदर्शन भी हो रहे हैं। इस बीच केंद्र सरकार की पहली प्रतिक्रिया आ गई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का कहना है कि इन नियमों का दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा और किसी को इसका बेजा इस्तेमाल भी नहीं करने दिया जाएगा। उनका यह बयान अहम है क्योंकि इस समय यूजीसी नियमों को लेकर देश भर में डिबेट तेज चल रही है। इसके चलते भाजपा की मुश्किलें बढ़ने की बात कही जा रही है, जिसका एक मजबूत वोट बैंक सवर्ण समाज के लोग रहे हैं।

मैं एक बात बहुत विनम्रता से कहना चाहता हूं कि किसी का उत्पीड़न नहीं होने दिया जाएगा। कोई भेदभाव नहीं होगा। यूजीसी, भारत सरकार और राज्य सरकारों की यह जिम्मेदारी होगी। यह मसला तो सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में ही है। मैं स्पष्ट कह रहा हूं कि किसी के भी साथ अत्याचार या भेदभाव नहीं होगा। इसके अलावा भेदभाव के नाम पर किसी को भी यह अधिकार नहीं होगा कि वह कानून का बेजा इस्तेमाल करे। उन्होंने कहा कि हर चीज संविधान के दायरे में होगी।

बता दें कि यह मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। सत्ताधारी दल भाजपा के ही कई नेताओं ने रायबरेली और लखनऊ जैसे जिलों में अपने पदों से इस्तीफा दिया है। लखनऊ औऱ दिल्ली में इसके खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। इसके अलावा बरेली जिले के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा दिया है। इसके पीछे उन्होंने शंकराचार्य के अपमान और यूजीसी रूल्स को वजह बताया है।
प्रियंका चतुर्वेदी बोलीं- वापस लिए जाएं यूजीसी रूल्स, रामगोपाल क्या बोले

इस बीच राजनीति भी तेज हो गई है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी का कहना है कि इस नियम को वापस लिया जाए या फिर संशोधन किया जाए। वहीं समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने यूजीसी रूल्स का समर्थन किया है। बता दें कि कांग्रेस पार्टी ने अब तक इस मसले पर खुलकर कुछ भी नहीं कहा है।

 

 

#Dharmendra Pradhan

Source : Agency

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