Wednesday, July 29th, 2026

भोपाल में किसान आंदोलन तेज, राजधानी में प्रवेश से पहले सुरक्षा कड़ी; CM हाउस के चारों ओर पुलिस का सख्त पहरा

भोपाल

मध्यप्रदेश में प्रस्तावित किसान आंदोलन को देखते हुए राजधानी भोपाल में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। हालांकि प्रशासन का दावा है कि किसान आंदोलन का मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सुरक्षा या सीएम हाउस की सुरक्षा व्यवस्था पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

मुख्यमंत्री निवास की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों पॉलीटेक्निक चौराहा और कमलापार्क तिराहे के आसपास करीब 20 दिन पहले ही पुलिस आयुक्त संजय कुमार ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 लागू कर दी थी। इसके तहत सीएम हाउस के आसपास लगभग एक किलोमीटर के दायरे में धरना-प्रदर्शन और चार से अधिक लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध है। दरअसल, वर्ष 2010 में किसानों ने अचानक रोशनपुरा चौराहे से लेकर सीएम हाउस तक तीन दिशाओं से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के जरिए घेराव कर दिया था। उसी घटना के बाद से पुलिस मुख्यालय मुख्यमंत्री निवास की सुरक्षा को लेकर हमेशा विशेष सतर्कता बरतता है। 

जिले की सीमाओं पर बढ़ेगी सख्ती
भोपाल पुलिस आयुक्त के निर्देश पर जिले का पूरा पुलिस अमला किसान आंदोलन को लेकर अलर्ट मोड पर है। शहर में प्रवेश करने वाले सभी राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों, प्रमुख सड़कों तथा अन्य मार्गों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। मंगलवार शाम तक सभी चौराहों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात नहीं किया गया था, लेकिन खुफिया एजेंसियां पल-पल की जानकारी जुटा रही हैं। 

जैसे ही किसानों का जत्था भोपाल की सीमा के करीब पहुंचेगा, शहर में प्रवेश करने वाले सभी मार्गों पर सघन जांच शुरू कर दी जाएगी। बिना अनुमति ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और अन्य वाहनों को शहर में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। पुलिस पूरी तरह अलर्ट है, लेकिन आंदोलन किसानों से जुड़ा होने के कारण सुरक्षा तैयारियों का सार्वजनिक रूप से खुलासा नहीं किया जा रहा है।

बैरिकेड तोड़ भोपाल की ओर बढ़े किसान

मूंग की पूरी उपज समर्थन मूल्य पर खरीदने समेत किसानों की आठ सूत्रीय मांगों को लेकर शुरू हुआ आंदोलन मंगलवार को और तेज हो गया है। नर्मदापुरम से भोपाल के लिए निकली संयुक्त किसान मोर्चा की पदयात्रा सोमवार को प्रशासन की रोक-टोक के बावजूद आगे बढ़ती रही। किसानों के भोपाल की ओर बढ़ने के साथ ओबैदुल्लागंज से भोपाल की तरफ जाने वाला हाईवे बंद है, वहीं जबलपुर की तरफ से सुल्तानपुर मार्ग भी प्रभावित है।

हालांकि इसके बावजूद 500 से अधिक किसान पैदल ही वैकल्पिक रास्तों से आगे बढ़ गए। पुलिस ने नेशनल हाईवे-45 पर बैरिकेडिंग कर किसानों को रोकने का प्रयास किया, लेकिन किसान बैरिकेड पार कर मंडीदीप होते हुए भोपाल की ओर रवाना हो गए। मौके पर रायसेन, विदिशा, सीहोर, नर्मदापुरम (होशंगाबाद) और बैतूल जिले का भारी पुलिस बल तैनात रहा। रायसेन कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक भी पूरे घटनाक्रम के दौरान मौके पर मौजूद रहे। 

नर्मदापुरम से निकले किसान, रास्ते में कई बार रोका गया
किसान पदयात्रा सोमवार को नर्मदापुरम से आगे बढ़ी। प्रशासन ने रास्ते में बैरिकेडिंग कर किसानों को रोकने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी आगे बढ़ते रहे। नर्मदा पुल के पास से लेकर बुधनी क्षेत्र तक कई जगह पुलिस और किसानों के बीच आमना-सामना हुआ। किसानों ने रास्ते में लगाए गए पांच बैरिकेड हटाकर आगे का रास्ता बनाया। इसके बाद यात्रा बरखेड़ा तक पहुंची। रात में विश्राम के बाद मंगलवार को किसानों ने भोपाल की तरफ फिर कूच किया। 

हाथों में तिरंगा, 'जय जवान-जय किसान' के नारे लगाए
भोपाल में प्रवेश के बाद किसान हाथों में तिरंगा लेकर आगे बढ़े। इस दौरान वे लगातार 'जय जवान-जय किसान' के नारे लगाते रहे। किसानों के साथ ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य वाहनों का काफिला भी राजधानी में दाखिल हुआ।

7 दिन का राशन-पानी साथ लाए किसान
भोपाल कूच में शामिल किसान लंबी लड़ाई की तैयारी के साथ आए हैं। वे ट्रैक्टर-ट्रॉली में सात दिन का राशन और पानी लेकर पहुंचे हैं। कई किसान पहले से दाल-बाटी बनाकर भी साथ लाए हैं। उनका कहना है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा और वे किसी भी परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार हैं।

सुबह से शाम तक पुलिस-किसानों में खींचतान
पहले दिन करीब सुबह 9 बजे से शाम 7:30 बजे तक अलग-अलग स्थानों पर किसानों और पुलिस के बीच गतिरोध बना रहा। प्रशासन ने नर्मदापुरम शहर में प्रवेश से लेकर सेठानी घाट, इंदिरा चौक, भोपाल चौराहा और डोंगरवाड़ा सहित कई जगहों पर किसानों को रोकने का प्रयास किया। हालांकि, किसान पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। पदयात्रा में युवा किसानों के साथ बुजुर्ग भी शामिल रहे। सोमवार की लंबी पैदल यात्रा के बाद किसान बरखेड़ा पहुंचे और मंगलवार को फिर राजधानी की ओर बढ़े। 

हाईवे पर यातायात प्रभावित, वैकल्पिक रास्तों का दबाव
किसानों के भोपाल की ओर बढ़ने के कारण ओबैदुल्लागंज-भोपाल मार्ग पर यातायात प्रभावित है। इसके साथ जबलपुर की ओर से आने वाले वाहनों के लिए सुल्तानपुर मार्ग भी प्रभावित होने की सूचना है। ऐसे में भोपाल की तरफ आने-जाने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह आंदोलन ऐसे समय तेज हुआ है जब मूंग की एमएसपी खरीदी को लेकर प्रदेश में किसान पहले से प्रदर्शन कर रहे हैं। इससे पहले भी किसानों ने हाईवे जाम और विधानसभा घेराव की चेतावनी दी थी। 

गुरुद्वारा बंद कराने का किसान नेताओं ने लगाया आरोप
किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि औबेदुल्लागंज स्थित गुरुद्वारे में किसानों के ठहरने की व्यवस्था थी, लेकिन प्रशासन ने गुरुद्वारा बंद करा दिया। उनका कहना है कि नर्मदापुरम में आंदोलन के चलते देरी होने के बाद किसानों को रात बरखेड़ा में गुजारनी पड़ी।
 
इन मांगों पर अड़े किसान
किसानों की मांगों की सूची में मूंग की 100 प्रतिशत उपज समर्थन मूल्य पर खरीदी जाए, ई-टोकन व्यवस्था खत्म की जाए, एमएसपी पर खरीद की कानूनी गारंटी दी जाए, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में सुधार किया जाए, अघोषित बिजली कटौती बंद की जाए, अनुदान पर ट्रांसफार्मर उपलब्ध कराए जाएं, ग्रामीण सड़कों का निर्माण कराया जाए, भारत-अमेरिका ट्रेड डील समाप्त करने की मांग की है। 

किसानों का ऐलान-मांग पूरी होने तक आंदोलन
संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि सिर्फ आश्वासन से आंदोलन खत्म नहीं होगा। किसानों का कहना है कि सरकार को मूंग की पूरी उपज एमएसपी पर खरीदने सहित सभी मांगों पर ठोस फैसला लेना होगा। इसके बाद ही आंदोलन वापस लेने पर विचार किया जाएगा। फिलहाल किसानों का काफिला राजधानी की तरफ बढ़ रहा है और दो प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित होने से प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था के साथ ट्रैफिक मैनेजमेंट की भी चुनौती खड़ी हो गई है।

किसानों का जत्था औबेदुल्लागंज पहुंचा
मंगलवार सुबह किसानों का जत्था औबेदुल्लागंज पहुंचा, जहां से भोपाल के लिए आंदोलन का अगला चरण शुरू किया गया। पूरे मार्ग पर पुलिस और प्रशासन की कड़ी निगरानी रही, लेकिन किसान अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ते रहे। किसान नेताओं का कहना है कि फिलहाल यह तीन दिवसीय आंदोलन है। यदि इस दौरान सरकार ने 100 प्रतिशत मूंग खरीदी को लेकर कोई ठोस घोषणा नहीं की, तो आंदोलन को अनिश्चितकालीन कर दिया जाएगा। किसानों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांगें पूरी होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। आंदोलन के भोपाल पहुंचने के साथ ही प्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं।

क्यों आ रहे हैं किसान?
दरअसल, मध्य प्रदेश में किसान सड़क पर उतर आए हैं। मूंग की पूरी उपज समर्थन मूल्य पर खरीदने की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन तेज हो गया है। आठ सूत्रीय मांगों को लेकर शुरू हुई संयुक्त किसान मोर्चा की पदयात्रा अब प्रदेश की राजधानी भोपाल के करीब पहुंच गई है।

ये है आठ सूत्रीय मांग

    मूंग की 100 प्रतिशत उपज समर्थन मूल्य पर खरीदी जाए
    ई-टोकन व्यवस्था खत्म की जाए
    एमएसपी पर खरीद की कानूनी गारंटी दी जाए
    प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में सुधार किया जाए
    अघोषित बिजली कटौती बंद की जाए
    अनुदान पर ट्रांसफार्मर उपलब्ध कराए जाएं
    ग्रामीण सड़कों का निर्माण कराया जाए
    भारत-अमेरिका ट्रेड डील समाप्त करने की मांग 
 

 

#Farmer

Source : Agency

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