Jharkhand Education Update: विदेश शिक्षा और रिसर्च के लिए सिंगल विंडो सिस्टम की शुरुआत
रांची
झारखंड सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने राज्य में 'ऑफिस ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स' (Office of International Affairs) की स्थापना का निर्णय लिया है। यह कार्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), 2020 के प्रावधानों के तहत कार्य करेगा।
उच्च शिक्षा के वैश्वीकरण के लिए एक 'सिंगल विंडो' सुविधा प्रदान करेगा। इसका मुख्य उद्देश्य झारखंड के छात्रों को अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक मानकों से जोड़ना और विदेशी संस्थानों तक उनकी पहुंच को सुलभ बनाना है।
एक्सचेंज प्रोग्राम और अंतरराष्ट्रीय सहयोग
यह कार्यालय प्रमुख रूप से एक्सचेंज प्रोग्राम संचालित करेगा, जिससे झारखंड के विद्यार्थी विदेशों में जाकर उच्च शिक्षा और शोध (Research) कर सकेंगे। इसके साथ ही, विदेशी छात्रों को भी झारखंड के शिक्षण संस्थानों में अध्ययन और शोध के अवसर दिए जाएंगे।
कार्यालय की मुख्य भूमिकाएं
नामांकन में सहायता: विदेशी विश्वविद्यालयों में चलने वाले कोर्सेज और उनकी जटिल नामांकन प्रक्रिया की जानकारी विद्यार्थियों को यहां उपलब्ध होगी।
कार्यशालाओं का आयोजन: शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में कार्यशालाएं होंगी, जहां विदेशी संस्थानों के प्रतिनिधि छात्रों का मार्गदर्शन करेंगे।
झारखंड की ब्रांडिंग: विदेशों में विशेष कार्यक्रम आयोजित कर झारखंड के संस्थानों की शोध क्षमताओं और अवसरों से दुनिया को अवगत कराया जाएगा।
वित्तीय योजनाओं का संचालन: भविष्य में उच्च शिक्षा के लिए स्वीकृत होने वाली आर्थिक सहायता योजनाओं का क्रियान्वयन भी इसी कार्यालय के माध्यम से होगा।
मरांगगोके पारदेशीय छात्रवृत्ति योजना को मिलेगा बल
झारखंड सरकार वर्तमान में 'मरांगगोमके जयपाल सिंह मुंडा पारदेशीय छात्रवृत्ति योजना' के माध्यम से राज्य के प्रतिभाशाली बच्चों को विदेश भेज रही है। हाल ही में इस योजना के लाभार्थियों की संख्या 25 से बढ़ाकर 50 कर दी गई है।
इस योजना के तहत एसटी, एससी और ओबीसी श्रेणी के छात्रों को यूनाइटेड किंगडम और उत्तरी आयरलैंड के विश्वविद्यालयों में मास्टर और एमफिल करने के लिए 100% वित्तीय सहायता दी जाती है। 'ऑफिस ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स' के गठन के बाद इस योजना का संचालन और भी अधिक प्रभावी और सुव्यवस्थित होने की संभावना है।
राज्य सरकार के इस कदम से न केवल झारखंड के मेधावी छात्र वैश्विक स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकेंगे, बल्कि झारखंड भी उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर मजबूती से उभरेगा।

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