Tuesday, July 21st, 2026

मतदाता सूची पुनरीक्षण में गड़बड़ी, फॉर्म भरने को लेकर बड़ा भ्रम

 रांची
 विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत मतदाताओं से एन्यूमरेशन फॉर्म भरवाने का कार्य जारी है, लेकिन कई बीएलओ के डोर-टू-डोर नहीं पहुंचने से बड़ी संख्या में मतदाताओं को फॉर्म भरने में परेशानी हो रही है।

कई मतदाताओं का कहना है कि उन्हें या तो फॉर्म मिला ही नहीं या फिर केवल फॉर्म थमा दिया गया, लेकिन उसे भरने की प्रक्रिया नहीं समझाई गई। ऐसे में कई लोगों को बीएलओ से फोन पर संपर्क करना पड़ा, जबकि कई मतदाताओं को विशेष शिविर में जाकर जानकारी लेनी पड़ी।

जो मतदाता बीएलओ से संपर्क नहीं कर सके, वे जानकारी के अभाव में अनुमान के आधार पर फार्म भर रहे हैं, जिससे बड़ी संख्या में गलतियां सामने आ रही हैं।

जानकारी के अभाव में मतदाता उन कालमों में भी विवरण भर रहे हैं, जिन्हें उनकी स्थिति में भरने की आवश्यकता नहीं है। कई लोग अपने नाम के स्थान पर माता-पिता का विवरण भर रहे हैं, तो कई ऐसे कॉलम भर रहे हैं जिन्हें खाली छोड़ना था। बाद में फॉर्म में व्हाइटनर लगाकर सुधार करना पड़ रहा है। कई मामलों में बीएलओ को भी ऑनलाइन डाटा प्रविष्टि के समय इन गलतियों को ठीक करना पड़ रहा है।

सबसे अधिक भ्रम वर्ष 2003 के विशेष गहन पुनरीक्षण की मतदाता सूची से जुड़े कालम को लेकर है। अधिकांश मतदाताओं को यह जानकारी नहीं है कि यदि वर्ष 2003 की मतदाता सूची में उनका स्वयं का नाम दर्ज है तो कौन-सा कॉलम भरना है।

वहीं, यदि स्वयं का नाम दर्ज नहीं है, लेकिन माता-पिता, दादा-दादी अथवा नाना-नानी में से किसी का नाम उस सूची में है, तो किस कॉलम में उनका विवरण भरना है। इसी भ्रम के कारण बड़ी संख्या में फार्म गलत भरे जा रहे हैं।

शिकायतों के बाद रांची जिले की सातों विधानसभा क्षेत्रों में 150 से अधिक बीएलओ को शोकॉज किया जा चुका है। आरोप है कि कई बीएलओ ने डोर-टू-डोर जाकर मतदाताओं को फॉर्म उपलब्ध कराने और उसे भरने की प्रक्रिया समझाने का कार्य संतोषजनक ढंग से नहीं किया।

इसका सीधा असर एसआईआर अभियान पर पड़ रहा है। मतदाताओं का कहना है कि यदि बीएलओ घर-घर जाकर फॉर्म की जानकारी देते, तो इतनी संख्या में गलतियां नहीं होती।

प्रशासन ने मतदाताओं से अपील की है कि फॉर्म भरने से पहले उसकी प्रक्रिया को अच्छी तरह समझ लें। यदि किसी कॉलम को लेकर भ्रम हो तो संबंधित बीएलओ या विशेष शिविर में जाकर जानकारी प्राप्त करें, ताकि बाद में फॉर्म में सुधार की आवश्यकता न पड़े।

फॉर्म भरते समय इन बातों का रखें ध्यान
1. ऊपरी और बायां भाग
फॉर्म के ऊपरी तथा बाएं हिस्से में वर्तमान मतदाता सूची के अनुसार नाम, पिता/पति/माता का नाम, आयु, पता एवं फोटो पहले से मुद्रित है। यहां दिए गए क्यूआर कोड को स्कैन कर बीएलओ एप में पूरा विवरण देखा जा सकता है।

2. यदि वर्ष 2003 की एसआईआर मतदाता सूची में स्वयं का नाम दर्ज है
यदि मतदाता का नाम वर्ष 2003 (अन्य राज्यों में 2002, 2003, 2004 अथवा 2025) की विशेष गहन पुनरीक्षण मतदाता सूची में दर्ज है, तो फॉर्म के बाएं भाग में उसी सूची के अनुसार अपना पूरा विवरण अंकित करें। यदि नाम दर्ज नहीं है, तो इस हिस्से को तिरछा काट दें या खाली छोड़ दें।

3. यदि स्वयं का नाम नहीं, लेकिन रिश्तेदार का नाम दर्ज है
यदि मतदाता का नाम वर्ष 2003 की सूची में नहीं है, लेकिन माता-पिता, दादा-दादी अथवा नाना-नानी में से किसी का नाम दर्ज है, तो फॉर्म के दाएं भाग में उनमें से किसी एक का विवरण उसी प्रकार भरें, जैसा बीएलओ एप में मैप किया गया है।

4. निचले हिस्से में यह जानकारी भरें
जन्म तिथि, मोबाइल नंबर, आधार नंबर (वैकल्पिक), तथा माता-पिता एवं पति/पत्नी (जहां लागू हो) का सही विवरण अंकित करें। माता-पिता का नाम देना अनिवार्य है।

जन्मतिथि के आधार पर ऐसे भरें फॉर्म

  • जन्म तिथि 01 जुलाई 1987 से पहले तथा वर्ष 2003 की मतदाता सूची में स्वयं का नाम दर्ज है, तो बाएं भाग में अपना पूरा विवरण भरें।
  • जन्म तिथि 01 जुलाई 1987 के बाद और 02 दिसंबर 2004 से पहले है तथा माता या पिता का नाम वर्ष 2003 की सूची में दर्ज है, तो दाएं भाग में माता या पिता का विवरण भरें।
  • जन्म तिथि 02 दिसंबर 2004 के बाद है तथा माता-पिता का नाम वर्ष 2003 की सूची में दर्ज है, तो दाएं भाग में माता या पिता में से किसी एक का पूरा विवरण अंकित करें

 

#SIR

Source : Agency

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