Wednesday, July 1st, 2026

मतदाता सूची सुधार में वालेंटियर्स की भूमिका को लेकर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी का स्पष्टीकरण।

रांची
 मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रवि कुमार ने कहा है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) में विशेष परिस्थितियों में ही शिक्षकों को वालेंटियर के रूप में लगाया गया है।

उन्होंने बुधवार को प्रेस बयान जारी कर कहा कि विभिन्न माध्यमों से यह संज्ञान में आया है कि वालेंटियर्स के रूप में चयनित शिक्षकों को अपने शिक्षण के कार्यों के साथ-साथ SIR के कार्यों में बीएलओ के सहयोग में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि अन्य सरकारी पद पर कार्यरत पदाधिकारियों के साथ–साथ विशेष परिस्थितियों में जहां इस संवर्ग के पदाधिकारी की उपलब्धता नहीं है, वहां ही वोलेंटियर्स के लिए शिक्षकों को भी चयनित किया गया है।

रवि कुमार ने कहा कि शिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों का शिक्षण एक अति महत्वपूर्ण विषय है। इसके लिए पहले से ही निर्वाचन के कार्यों में कम से कम शिक्षकों को सम्मिलित किया गया है।

चूंकि निर्वाचन सेवा के पदाधिकारियों एवं कर्मियों की संख्या सीमित होती है, इसलिए निर्वाचन अथवा निर्वाचन से जुड़े कार्यों के लिए अन्य सेवा के पदाधिकारियों एवं कर्मियों की आवश्यकता होती है।

विद्यार्थियों के शिक्षण के साथ–साथ भारत के प्रत्येक पात्र नागरिक को मतदाता सूची से जोड़ना भी महत्वपूर्ण कार्य है ताकि वे मताधिकार से वंचित न हाें।

प्रवासी मजदूरों का नहीं जुड़ पाया नाम
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि उन्होंने अपने क्षेत्रीय दौरों के क्रम में देखा कि कई पात्र नागरिक (विशेषकर प्रवासी मजदूर) पहचान दस्तावेज (जैसे आधार कार्ड आदि) की कमी के कारण अबतक मतदाता सूची में सम्मिलित नहीं हो सके है।

जबकि भारत के मतदाता होने के लिए केवल भारतीय नागरिक, 18 वर्ष की उम्र प्राप्त करना एवं उस मतदान क्षेत्र का सामान्य निवासी होना होता है, जिसके लिए कई तरह के दस्तावेज मान्य हैं।

इसे ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग के आदेश पर वालेंटियर्स को तैनात किया गया है, ताकि ऐसे मतदाताओं, विशेष रूप से वृद्ध, बीमार, दिव्यांग, गरीब और अन्य संवेदनशील समूहों को हर संभव सहायता प्रदान किया जा सके। वालेंटियर्स यह सुनिश्चित करेंगे कि ऐसे मतदाताओं को किसी भी तरह से परेशान न किया जाए।

वालेंटियर्स के कार्य
    वर्ष 2026 की मतदाता सूची में डुप्लीकेट, मृत्यु, स्थायी रूप से स्थानांतरित, अनुपस्थित/लापता और विदेशी मतदाता तथा अनमैप्ड मतदाताओं की पहचान और सहायता।
    भारत के पात्र नागरिकों को मतदाता के रूप में नामांकित करने में सहायता
    बीएलओ-बीएलए-2 बैठक की कार्यवाही का डाक्यूमेंटेशन में मदद करना
    बीएलओ-बीएलए-2 बैठक के माध्यम से एएसडीडी सूची तैयार करने और उसे अंतिम रूप देने में बीएलओ की सहायता करना
    SIR को लेकर जागरूकता फैलाना:
    क्षेत्रीय मुद्दों तथा गलत ढंग से मतदाता सूची में सम्मिलित होने के प्रयास करनेवालों की पहचान करना और अधिकारियों को सूचित करना।

ताेरपा में 40 वर्ष से अधिक आयु वाले लोगाें का भी मतदाता सूची में नाम नहीं
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने 30 जून को तोरपा विधानसभा क्षेत्र के दो मतदान केंद्रों पर बीएलओ-बीएलए-2 बैठक का निरीक्षण किया था। इसमें यह बात सामने आई कि जन तीन पात्र आदिवासी की उम्र 40 वर्ष से अधिक होने पर भी मतदाता के रूप में इसलिए नामांकित नहीं थे, क्योंकि उनके पास पहचान दस्तावेज (जैसे आधार कार्ड) नहीं थे।

ये लोग तत्कालीन आधार कार्ड शिविरों के दौरान झारखंड से बाहर ईंट भट्ठों में मजदूर के रूप में और पंजाब में कृषि मजदूर के रूप में काम कर रहे थे, जिसके कारण वे उस समय अपना आधार कार्ड नहीं बनवा पाए।

इसी तरह, 13 जून को रातू रोड, रांची में एक व्यक्ति से मिला, जिसकी उम्र लगभग 40 वर्ष थी, लेकिन उसका नाम न तो 2003 की पिछली SIR सूची में दर्ज था और न ही 2026 की वर्तमान मतदाता सूची में है। 

 

#SIR

Source : Agency

आपकी राय

10 + 15 =

पाठको की राय