Thursday, July 9th, 2026

Betwa River Clean Plan: 2053 तक नदी को स्वच्छ रखने की तैयारी, नालों का गंदा पानी होगा पूरी तरह नियंत्रित

भोपाल 
बेतवा नदी पुनर्जीवन परियोजना को दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ तैयार किया जा रहा है। परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) केवल वर्तमान आवश्यकताओं पर आधारित नहीं होगी, बल्कि वर्ष 2053 तक की अनुमानित आबादी, सीवेज उत्पादन और शहरी विस्तार को ध्यान में रखकर बनाई जाएगी। इसका उद्देश्य भविष्य में बढ़ती आबादी और नई कॉलोनियों के बावजूद नदी को प्रदूषण से मुक्त रखना और बार-बार नई परियोजनाओं की आवश्यकता को कम करना है।

डीपीआर में इंटरसेप्शन नेटवर्क, सीवर लाइन, पंपिंग स्टेशन और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की क्षमता भविष्य की जरूरतों के अनुसार तय की जाएगी। इसके साथ ही अतिरिक्त क्षमता और विस्तार की व्यवस्था भी डिजाइन का हिस्सा होगी, ताकि आने वाले वर्षों में सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।

नदी में मिलने से पहले रोका जाएगा हर गंदा नाला

परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा इंटरसेप्शन और डायवर्जन सिस्टम होगा। इसके तहत बेतवा नदी में मिलने वाले सभी नालों की पहचान और मैपिंग की जाएगी। प्रत्येक नाले के प्रवाह का आकलन करने के बाद नदी में मिलने से पहले इंटरसेप्शन स्ट्रक्चर बनाकर गंदे पानी को रोक लिया जाएगा।

इसके बाद सीवेज को सीवर नेटवर्क या राइजिंग मेन के माध्यम से एसटीपी तक पहुंचाया जाएगा। जहां गुरुत्वाकर्षण आधारित प्रवाह संभव नहीं होगा, वहां पंपिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। वहीं, बारिश के दौरान अतिरिक्त पानी की निकासी के लिए अलग बायपास सिस्टम बनाया जाएगा, जिससे एसटीपी पर अतिरिक्त भार नहीं पड़ेगा।


मंडीदीप और विदिशा बने प्रमुख प्रदूषण स्रोत
प्रस्तुति में बेतवा नदी की मौजूदा स्थिति का भी विस्तृत विश्लेषण किया गया है। इसके अनुसार मंडीदीप क्षेत्र से घरेलू सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट और खुले नालों का गंदा पानी सीधे नदी में पहुंच रहा है। मंडीदीप औद्योगिक क्षेत्र में अभी तक कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) नहीं होने से प्रदूषण की समस्या और गंभीर बनी हुई है।

इसके अलावा विदिशा के तीन प्रमुख नालों का बिना उपचार किया गया सीवेज भी सीधे बेतवा नदी में छोड़ा जा रहा है। कोलार जलशोधन संयंत्र का बैकवॉश पानी भी नदी की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है। कई स्थानों पर जलकुंभी (वाटर हायसिंथ) और अत्यधिक जैविक प्रदूषण (यूट्रोफिकेशन) की स्थिति भी सामने आई है।

15 वर्ष तक संचालन और ऑनलाइन निगरानी की व्यवस्था
परियोजना में केवल निर्माण ही नहीं, बल्कि 15 वर्षों तक संचालन एवं रखरखाव (ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस) की जिम्मेदारी भी शामिल की जाएगी। एससीएडीए (SCADA) और ऑनलाइन कंटीन्यूअस एफ्लुएंट मॉनिटरिंग सिस्टम (OCEMS) के माध्यम से संयंत्रों के प्रदर्शन और जल गुणवत्ता की लगातार निगरानी की जाएगी। किसी भी प्रकार की गड़बड़ी सामने आने पर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की जा सकेगी।

सर्वे से लागत तक हर चरण होगा तय
डीपीआर चरणबद्ध तरीके से तैयार होगी। सबसे पहले नदी, नालों, जलग्रहण क्षेत्र, मिट्टी और भू-आकृति का विस्तृत सर्वे किया जाएगा। इसके बाद सीवेज की मात्रा का आकलन, उपचार तकनीक का चयन, इंजीनियरिंग डिजाइन, ड्रॉइंग, परियोजना लागत, वित्तीय व्यवहार्यता और पर्यावरणीय स्वीकृतियों को अंतिम रूप दिया जाएगा।

परियोजना लागत का निर्धारण नवीनतम शेड्यूल ऑफ रेट (एसओआर) के आधार पर किया जाएगा। प्रस्तुति में यह भी स्पष्ट किया गया है कि स्वीकृति के बाद लागत बढ़ने की स्थिति में अतिरिक्त वित्तीय भार परियोजना लागू करने वाली एजेंसी को उठाना पड़ सकता है, इसलिए प्रारंभिक लागत का सटीक आकलन किया जाएगा।

दीर्घकालिक नदी संरक्षण पर रहेगा फोकस
बेतवा नदी पुनर्जीवन परियोजना को केवल निर्माण कार्य तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे दीर्घकालिक नदी संरक्षण योजना के रूप में विकसित किया जा रहा है। परियोजना के चार प्रमुख आधार—पर्यावरण संरक्षण, वित्तीय स्थिरता, संस्थागत जवाबदेही और सामाजिक भागीदारी—रहेंगे।

परियोजना का उद्देश्य नदी की जल गुणवत्ता में सुधार, प्रदूषण भार को कम करना, स्थानीय निकायों के लिए संचालन को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाना तथा आम लोगों को स्वच्छ जल उपलब्ध कराना है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए पूरी योजना को वर्ष 2053 तक प्रभावी बनाए रखने की रूपरेखा तैयार की जा रही है।

.

 

#Betwa River

Source : Agency

आपकी राय

5 + 5 =

पाठको की राय