Thursday, April 30th, 2026

रिहाई के पहले भावुक हुई महिला, हाईकोर्ट से मांगी मदद—बच्चों के अपनाने को लेकर जताई चिंता

ग्वालियर

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में जसोधा उर्फ रानी की अपील पर सुनवाई के दौरान एक संवेदनशील पहलू सामने आया, जहां न्यायालय ने रिहाई से पहले उसके बच्चों की मानसिक स्थिति जानना जरूरी माना। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र यादव की खंडपीठ ने की।

अपीलकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने बताया कि महिला अपीलकर्ता करीब 9 साल से जेल में है और उसने अपनी रिहाई के लिए यह कहते हुए आवेदन दिया कि वह अपने 18 साल के बेटे और 16 साल की बेटी की देखभाल करना चाहती है।

कोर्ट के निर्देश पर पेश रिपोर्ट में सामने आया कि बेटा अब काम करता है और किराए के कमरे में अकेले रहता है। वहीं 16 साल की अपने चाचाओं के साथ रह रही है।

दोनों बच्चों ने पढ़ाई भी छोड़ दी है। लोक अभियोजक ने कोर्ट को बताया कि महिला की रिहाई के बाद वह बच्चों से संपर्क करने की कोशिश करेगी, लेकिन बेटा संभवतः उसे स्वीकार न करे।

साथ ही, महिला और उसके कथित साथी पवन जाटव उर्फ घोड़ा दोनों ही जेल में हैं, ऐसे में उनके आपसी संपर्क को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है।

इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने थाना प्रभारी, डबरा देहात जिला ग्वालियर और जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी को संयुक्त रूप से सोशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

इस रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया जाएगा कि दोनों बच्चे अपनी मां को जीवन में स्वीकार करना चाहते हैं या नहीं, और परिवार में उनका साथ रहना संभव होगा या नहीं।

साथ ही, जेल प्रशासन से भी महिला के व्यवहार और सह-आरोपित पवन जाटव से उसके संपर्क को लेकर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। कोर्ट ने यह सभी रिपोर्ट अगली सुनवाई से पहले पेश करने को कहा है।

 

#Will my children#accept me?

Source : Agency

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