Saturday, August 8th, 2026

Mahakal Nagari Ujjain: 11 अगस्त को मनाया जाएगा आजादी का पर्व, 1947 की तिथि गणना से जुड़ी है खास मान्यता

उज्जैन
देश भर में आजादी का पर्व 15 अगस्त को मनाया जाता है. लेकिन महाकाल की नगरी में एक ऐसा मंदिर है जिसकी स्थापना ही एक बड़े राष्ट्र, बड़े गणतंत्र और स्वयं के तंत्र के संकल्प के साथ हुई. हम बात उज्जैन के अति प्राचीन बड़ा गणेश मंदिर की कर रहे हैं, जो कि विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के गेट नंबर 5 के सामने है. मंदिर के पुजारी बताते हैं, मंदिर में आजादी का पर्व तारीख के अनुसार नहीं तिथि के अनुसार मनाया जाता है. जिसके पीछे एक बड़ा कारण है. एक ऐसी तिथि जो हर साल अलग-अलग तारीखों पर होती है. इस वर्ष 2026 में ये तिथि 11 अगस्त को है इसलिए 11 अगस्त को आजादी का पर्व मंदिर में मनाया जाएगा। 

इस रिपोर्ट में आप जानेंगे कि, राष्ट्रीय पर्व को लेकर ये योजना कब और कहा बनी. आजादी के दिन 15 अगस्त 1947 को भारतीय हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, विक्रम संवत (वर्ष) और तिथि (तारीख) क्या रही. आप जानेंगे इतना सब होने के बावजूद भी आखिर क्यों तिथि अनुसार मनाया जाने वाला हमारा राष्ट्रीय पर्व 15 अगस्त अंग्रेजी तारीखों में ही सिमट गया। 

आजादी की तारीख को लेकर हुआ था बड़ा निर्णय
उज्जैन का बड़ा गणेश मंदिर 125 वर्ष पुराना स्थापित मंदिर है. जहां के 90 वर्षीय पंडित एवं विख्यात ज्योतिषाचार्य आनंद शंकर व्यास ने चर्चा में बताया कि, ''ये मंदिर ज्योतिर्लिंग दक्षिण मुखी श्री महाकालेश्वरः एवं शक्तिपीठि हरसिद्धि माता मंदिर के बीच बड़ा एवं छोटा रुद्र सागर तालाब से लगा हुआ है. इस मंदिर की स्थापना भारत जब आजाद भी नहीं हुआ था, उसके पूर्व मेरे दादाजी नारायण व्यास ने की थी। 

नारायण व्यास एक विश्व विख्यात ज्योतिषाचार्य थे. उनके समय में बाल गंगाधर तिलक ने महाराष्ट्र के पुणे में ज्योतिष अधिवेशन रखा था. जहां स्टेट की और से दादा नारायण व्यास पहुंचे थे. वहां पहुंचे तो बालगंगाधर तिलक ने दादाजी से कहा आप तो कालगणना के केंद्र महाकाल की नगरी से हैं और आप खुद महाकाल स्वरूप में नारायण महाराज अधिवेशन में पधारे हैं तो काल का निर्णय निश्चित ही होगा. ये निर्णय कोई आम निर्णय नहीं था, ये योजना थी भारत के आज़ाद होने की तारीख को तिथि अनुसार सुनिश्चित करने की। 

मंदिर पक्ष का प्रमाण के साथ दावा
पंडित आनंद शंकर व्यास ने अधिक जानकारी देते हुए बताया, ''जब ज्योतिष अधिवेशन में बालगंगाधर तिलक ने दादाजी से पूछा तो दादाजी ने उन्हें गणना कर तिथि बताई. बताया जब भी भारत की आजादी की घोषणा हो तो "श्रावण महीने की कृष्ण पक्ष की चौदस तिथि शुभ रहेगी." वैसा ही हुआ आजाद भारत का समय आया और हिन्दू कैलंडर अनुसार, विक्रम संवत 2005 तिथि थी श्रावण मास की कृष्ण पक्ष की चौदस जिसे आज अंग्रेजी तारीख अनुसार एवं अंग्रेजी कैलंडर अनुसार वर्ष 1947 दिन 15 अगस्त कहा जाता है. भारत की आजादी की घोषणा हुई। 

राखी, होली दीपावाली तिथि अनुसार ही आजादी का पर्व भी
मंदिर के पुजारी एवं ज्योतिष आनंद शंकर व्यास बताते हैं, ''आज भी हर एक पर्व तिथि अनुसार ही मनाया जाता है. जैसे राखी, होली, दिवाली कभी एक फिक्स तारीख पर नहीं आते वैसे ही हम हमारे राष्ट्रीय पर्व भी तिथि अनुसार मानते हैं. इस वर्ष आजादी का पर्व 15 अगस्त तिथी अनुसार हम 11 अगस्त को मनाएंगे और ठीक वैसे ही 26 जनवरी का पर्व भी हम तिथि अनुसार मनाते हैं. ऐसा हर साल यहां होता है, जिससे हमारी प्राचीन परमपराओं का निर्वहन हो सके और उन क्रांतिकारी, स्वतंत्रता सेनानी विद्वानों की विचार धारा का सम्मान बना रहे. आज के समय में हमारे राष्ट्रीय पर्व अंग्रेजी तारीखों में ही सिमटे रह गए हैं। 

 

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Source : Agency

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