Saturday, April 18th, 2026

मध्य प्रदेश के 40 लाख आवारा पशुओं को मिलेगा विशेष 12 अंकों का कोड, केसरिया टैग से पहचान होगी

भोपाल
 मध्य प्रदेश की सड़कों और खेतों में घूम रहे करीब 40 लाख आवारा पशुओं की पहचान अब दूर से ही हो सकेगी। केंद्र सरकार ने राज्य के उस प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है, जिसके तहत आवारा मवेशियों के कान पर 12 अंकों वाला केसरिया या लाल रंग का पहचान टैग लगाया जाएगा। अब तक सभी पशुओं को पीले रंग के टैग लगाए जाते थे, जिससे पालतू और लावारिस पशुओं के बीच फर्क करना मुश्किल होता था।

पहचान का नया डिजिटल फॉर्मूला
अपर मुख्य सचिव (पशुपालन) उमाकांत उमराव के मुताबिक, अधिकारियों को फील्ड में मवेशियों के प्रबंधन में काफी दिक्कतें आ रही थीं। नए रंगों के कोड से नगर निगम और मवेशी पकड़ने वाले दस्ते बिना स्कैन किए यह समझ पाएंगे कि कौन सा पशु आवारा है और कौन सा किसी डेयरी या घर का है। यह पूरी कवायद भारत पशुधन परियोजना का हिस्सा है, जिसमें हर मवेशी का अपना एक डिजिटल डेटाबेस होगा।
हादसों और मुआवजे का गणित
राज्य विधानसभा में पेश आंकड़े बताते हैं कि आवारा मवेशी अब जानलेवा साबित हो रहे हैं। पिछले दो साल में पशुओं की वजह से हुए 237 सड़क हादसों में 94 लोगों की मौत हो चुकी है। यानी हर तीसरे दिन सड़क पर एक व्यक्ति अपनी जान गंवा रहा है।

किसानों की दोहरी मार
एक तरफ सड़कों पर हादसे बढ़ रहे हैं, तो दूसरी तरफ खरीफ सीजन में किसान पूरी रात खेतों की रखवाली करने को मजबूर हैं। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल आवारा पशुओं द्वारा फसल बर्बादी पर मुआवजे का कोई प्रावधान नहीं है। पशुपालन मंत्री लखन पटेल ने सदन में बताया कि विभाग के पास नुकसान का सटीक आंकड़ा फिलहाल मौजूद नहीं है।

कानून क्या कहता है?
मध्य प्रदेश में मवेशियों को लावारिस छोड़ना गौ-वध प्रतिषेध अधिनियम 2004 के तहत अपराध है। इसके अलावा नगर निगम कानून के तहत मालिक पर पहली बार 200 रुपये और तीसरी बार पकड़े जाने पर 1,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। वर्तमान में मुख्यमंत्री गौ-सेवा योजना के तहत एनजीओ के माध्यम से लाखों पशुओं को आश्रय दिया जा रहा है, लेकिन सड़कों पर संख्या अब भी चुनौती बनी हुई है।

 

#cow

Source : Agency

आपकी राय

13 + 2 =

पाठको की राय