Saturday, August 8th, 2026

बिहार में 10 नए स्टील जेटी का निर्माण शुरू, किसानों और कारोबारियों को मिलेगा फायदा

पटना
 बिहार में अब कारोबार और आवागमन का नया रास्ता नदियों के जरिए तैयार किया जा रहा है। गंगा यानी राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (NW-1) के किनारे 16 नए सामुदायिक जेटी बनाने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। इन जेटी के जरिए यात्रियों के साथ-साथ सामान और स्थानीय उपज की आवाजाही को आसान बनाने की तैयारी है।

खास बात यह है कि 10 स्टील जेटी का निर्माण भी शुरू हो चुका है। वहीं गंडक नदी के राष्ट्रीय जलमार्ग-37 पर पश्चिम चंपारण में दो और जेटी प्रस्तावित हैं।

अगर यह योजना जमीन पर पूरी तरह उतरती है तो बिहार के कई इलाकों की अर्थव्यवस्था को नदी से जोड़ने में मदद मिल सकती है।

8 जिलों में बनेंगे नए जेटी, 10 का काम शुरू
परिवहन विभाग के अनुसार 17 चिन्हित स्थानों में से 16 जगहों के लिए जिलों से IWAI को एनओसी मिल चुकी है। इनमें पटना, वैशाली, सारण, समस्तीपुर, बेगूसराय, भागलपुर और आरा समेत कई इलाके शामिल हैं।

पटना में कंगनघाट, ग्यासपुर पीपापुल और महाजी पीपापुल जैसे स्थानों पर जेटी प्रस्तावित हैं। सारण में हरिहरनाथ मंदिर और सोनपुर तथा समस्तीपुर में पत्थरघाट और धरनीपट्टी पश्चिम को भी योजना में शामिल किया गया है।

बेगूसराय में सिमरिया घाट, अयोध्या घाट और चित्रोघाट पर जेटी निर्माण की योजना है। इनमें से 10 स्टील जेटी का निर्माण शुरू होना जल परिवहन परियोजना की रफ्तार को दिखाता है।

गंगा के बाद गंडक पर भी जल परिवहन का विस्तार
सरकार की नजर सिर्फ गंगा पर नहीं है, बल्कि गंडक नदी को भी जल परिवहन के नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी है। राष्ट्रीय जलमार्ग-37 पर पश्चिम चंपारण में दो सामुदायिक जेटी बनाने का प्रस्ताव है।

हालांकि चिन्हित स्थानों पर सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण इनका एनओसी अभी अटका हुआ है। जमीन की समस्या दूर होने के बाद इन परियोजनाओं को भी आगे बढ़ाया जा सकता है।

इससे उत्तर बिहार के नदी किनारे बसे इलाकों को जल परिवहन का नया विकल्प मिलने की उम्मीद है। यानी आने वाले समय में बिहार की नदियां सिर्फ सिंचाई और बाढ़ के लिए नहीं, बल्कि कारोबार के रास्ते के रूप में भी अहम हो सकती हैं।

11 जिलों में पहले से 21 जेटी, अब नेटवर्क होगा बड़ा
बिहार में सामुदायिक जेटी का नेटवर्क पहले से मौजूद है और अब इसका विस्तार किया जा रहा है। फिलहाल राज्य के 11 जिलों में गंगा के किनारे कुल 21 सामुदायिक जेटी मौजूद हैं।

पटना में दीघा, नकटा दियारा, पानापुर, नासरीगंज और बाढ़ समेत पांच स्थानों पर जेटी हैं। भागलपुर में तिनतंगा, सुल्तानगंज, कहलगांव और बटेश्वरनाथ में भी जेटी उपलब्ध हैं।

भोजपुर, वैशाली, कटिहार, बक्सर, सारण, समस्तीपुर, बेगूसराय, मुंगेर और खगड़िया भी इस नेटवर्क से जुड़े हैं। अब नए जेटी बनने के बाद यह नेटवर्क और विस्तृत होने वाला है।
किसानों से व्यापारियों तक, नदी बनेगी सस्ता रास्ता

सामुदायिक जेटी का सबसे बड़ा फायदा नदी किनारे रहने वाले स्थानीय लोगों को मिलने की उम्मीद है। किसानों की उपज, मछुआरों का सामान और स्थानीय कारोबार से जुड़ा माल कम लागत में एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया जा सकता है।

व्यापारियों के लिए जलमार्ग सड़क परिवहन के मुकाबले एक वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध करा सकता है। यात्रियों के लिए भी नदी के रास्ते आवाजाही को ज्यादा सुविधाजनक बनाने की कोशिश है।

जल परिवहन बढ़ने से सड़कों पर माल ढुलाई का दबाव भी कम किया जा सकता है। यानी एक जेटी सिर्फ नाव खड़ी करने की जगह नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए कनेक्टिविटी का नया केंद्र बन सकती है।

‘नदी किनारे’ से ‘नदी के रास्ते’ आगे बढ़ेगा बिहार
परिवहन विभाग के सचिव राज कुमार के मुताबिक सामुदायिक जेटी स्थानीय लोगों, किसानों, मछुआरों, व्यापारियों और यात्रियों के लिए उपयोगी साबित हो रहे हैं।

IWAI जेटी का निर्माण और दो साल तक सफल संचालन करने के बाद इसे इनलैंड वाटर ट्रांसपोर्ट, बिहार को हस्तांतरित करता है।

इस व्यवस्था से जेटी के निर्माण के साथ उसके संचालन की निरंतरता पर भी जोर दिया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य जल परिवहन को केवल यातायात का माध्यम बनाने तक सीमित नहीं, बल्कि आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का है।

नए जेटी इसी दिशा में एक अहम कड़ी माने जा रहे हैं।बिहार की नदियों को अगर कारोबार और यातायात के नेटवर्क से प्रभावी ढंग से जोड़ दिया गया, तो आने वाले वर्षों में राज्य जल परिवहन के बड़े हब के रूप में अपनी नई पहचान बना सकता है।

 

#Water transport

Source : Agency

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