Thursday, May 7th, 2026

माओवादी नेटवर्क पर बड़ा प्रहार: जंगल में छिपाया गया 7 करोड़ और 8 किलो सोना जब्त

जगदलपुर.

बस्तर में माओवादी नेटवर्क के कमजोर पड़ने के साथ अब उनके आर्थिक ढांचे की परतें खुलने लगी है। सुरक्षा बलों की लगातार सर्चिंग में ऐसे डंप सामने आ रहे हैं, जो इस बात की गवाही दे रहे हैं कि संगठन सिर्फ बंदूक के दम पर नहीं बल्कि मजबूत आर्थिक जाल पर भी टिका था।

बीते तीन महीनों में जवानों ने करीब 6 करोड़ 75 लाख रुपए नगद और 8 किलो सोना बरामद किया है, जो इस छिपे खजाने की एक झलक भर है। आईजी सुंदरराज पी के मुताबिक, यह बरामदगी अंदरूनी इलाकों में छिपाकर रखे गए डंप से हुई है, जिनकी तलाश अभी भी जारी है। जानकार बताते हैं कि नोटबंदी के बाद माओवादियों ने रणनीति बदली और नगद की जगह सोने में निवेश करना शुरू किया, ताकि जोखिम कम रहे। बरामद 8 किलो सोने की कीमत ही करीब 13 करोड़ रुपए आंकी गई है, जिससे संगठन की आर्थिक ताकत का अंदाजा लगाया जा सकता है। यह पैसा तेंदूपत्ता संग्राहकों, ठेकेदारों और विकास कार्यों में लगे लोगों से लेवी के रूप में वसूला जाता था, जो साल दर साल करोड़ों में पहुंचता था।

50 करोड़ से ज्यादा हो सकती है माओवादियों की छिपी पूंजी
वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र तिवारी मानते हैं कि अब तक मिली रकम सिर्फ सतह है, असल में बस्तर में ही माओवादियों की छिपी पूंजी 50 करोड़ से ज्यादा हो सकती है। यानी जैसे-जैसे माओवादी नेटवर्क खत्म हो रहा है, वैसे-वैसे उनका आर्थिक साम्राज्य भी उजागर हो रहा है। हालांकि खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है, क्योंकि जंगलों में छिपे ऐसे कई डंप अब भी सुरक्षा बलों के निशाने पर हैं। फिलहाल बस्तर में जारी सर्च ऑपरेशन सिर्फ हथियारों की तलाश नहीं, बल्कि माओवादियों की उस आर्थिक रीढ़ को तोड़ने की कोशिश भी है, जिस पर उनका पूरा नेटवर्क खड़ा था।

 

#Maoist Unearthed

Source : Agency

आपकी राय

10 + 9 =

पाठको की राय